Wednesday, February 23, 2011

मेरी दुनिया ये सूनी है ज़रा तुम छम से आ जाओ !
प्रणय का मौन आमंत्रण न यूँ इठला के ठुकराओ !
इससे पहले जमाना कि गिराए बिजलियाँ हम पर,
छुपा लो मन में तुम मुझको या मेरे मन में आ जाओ 
लवों पर गीत है मेरा मुझ ही में खो रहे हो तुम !
छुपा है चाँद सा चेहरा कि शायद रो रहे हो तुम !
लगाकर पतियाँ मन से संजोये हो मेरी यादें ,
मैं कैसे मान लूं कि अब पराये हो रहे हो तुम !!
स्वरों के खोल दो बंधन जुबां को आज गाने दो !
जो सोये हैं बहुत दिन से मुझे अरमां जगाने दो !
अहं को तोड़ कर वो आज आयेंगे मुझे मिलने,
हटाओ पुष्प राहों से मुझे पलकें बिछाने दो !!  


हमने तुम्हारा निम्नतम स्तर परख लिया 
बातें न करो हमसे तुम ऊंची उड़ान की !


कुत्ते  के मुंह से छीन के रोटी जो खा गया 
शेखियां बघारता है अपनी शान की !

जब खो गया था मैं कुछ देर के लिए 
सबने उड़ाई धज्जियाँ माई के मान की !

इज्जत जो आज है ज़रा, लोगों की आँख में 
क्या सोचते हो तुमसे है इस खानदान की !