"महत्वाकांक्षा"
एक पतंग
उड़ रही है आसमान में
ऊंचाइयों पर !
पतंग, जिसने पाल रखी हैं स्वयं की इच्छाएं, अभिलाषाएं, ज़रूरतें
अपने मन में !
बंधी हुई है वह एक डोरी से,
डोरी जो चल रही है पतंग बाज के इशारे पर !
आज है उसके पास खुला आसमान
उड़ने के लिए,
लोग लालायित हैं
उसके जैसी ऊँचाई पाने के लिए
पर वह है कि संतुष्ट नहीं
अपने आज से,
अपने जीवन से !
वह चाहती है उड़ना
उन्मुक्त गगन में,
आज़ाद पंछी की तरह !
न कर पाई वह ऐसा
चलती रही पतंग बाज के इशारे पर
सोचती रही,
काश ! कोई कर दे उसे अलग डोरी से
हो जाये वह आज़ाद !
हो गयी मुराद पूरी एक दिन
कहीं से आई एक दूसरी पतंग
उडती हुई
बंधी डोरी से,
काट दिया उसने इस पतंग की डोरी को !
लेकिन हाय !
बिन डोरी कहाँ टिक पाई वह आसमान में
गिरी ज़मीन पर
और दब कर रह गयी
उसकी इच्छाएं, अभिलाषाएं, जरूरतें
और
पंछी की तरह उन्मुक्त गगन में उड़ने की चाह !
जरूरी हैं स्वयं के पर भी
मर्जी के आसमान में उड़ने के लिए !
मनोज 'मनु'
एक पतंग
उड़ रही है आसमान में
ऊंचाइयों पर !
पतंग, जिसने पाल रखी हैं स्वयं की इच्छाएं, अभिलाषाएं, ज़रूरतें
अपने मन में !
बंधी हुई है वह एक डोरी से,
डोरी जो चल रही है पतंग बाज के इशारे पर !
आज है उसके पास खुला आसमान
उड़ने के लिए,
लोग लालायित हैं
उसके जैसी ऊँचाई पाने के लिए
पर वह है कि संतुष्ट नहीं
अपने आज से,
अपने जीवन से !
वह चाहती है उड़ना
उन्मुक्त गगन में,
आज़ाद पंछी की तरह !
न कर पाई वह ऐसा
चलती रही पतंग बाज के इशारे पर
सोचती रही,
काश ! कोई कर दे उसे अलग डोरी से
हो जाये वह आज़ाद !
हो गयी मुराद पूरी एक दिन
कहीं से आई एक दूसरी पतंग
उडती हुई
बंधी डोरी से,
काट दिया उसने इस पतंग की डोरी को !
लेकिन हाय !
बिन डोरी कहाँ टिक पाई वह आसमान में
गिरी ज़मीन पर
और दब कर रह गयी
उसकी इच्छाएं, अभिलाषाएं, जरूरतें
और
पंछी की तरह उन्मुक्त गगन में उड़ने की चाह !
जरूरी हैं स्वयं के पर भी
मर्जी के आसमान में उड़ने के लिए !
मनोज 'मनु'