Sunday, September 12, 2010
Saturday, September 11, 2010
मुद्दत के बाद फिर से वो आज मुस्कुराया है
शायद कोई परिंदा फिर उसने फंसाया है !
परवाना तो जलता है शमां की मुहब्बत में
है कौन मगर जिसने शमां को जलाया है !
यूँ तो बहुत मुश्किल था तेरे बिना जीना
यादों ने मगर तेरी मेरा साथ निभाया है !
वो आज मेरे आगे बढ-चढ़ के बोलते हैं
ऊँगली पकड़ के जिनको मैंने चलना सिखाया है !
भाता नहीं था मिलना मेरा जिनको एक पल भी
मेरी मौत कि खबर ने उनको भी रुलाया है !
मनोज "मनु"
शायद कोई परिंदा फिर उसने फंसाया है !
परवाना तो जलता है शमां की मुहब्बत में
है कौन मगर जिसने शमां को जलाया है !
यूँ तो बहुत मुश्किल था तेरे बिना जीना
यादों ने मगर तेरी मेरा साथ निभाया है !
वो आज मेरे आगे बढ-चढ़ के बोलते हैं
ऊँगली पकड़ के जिनको मैंने चलना सिखाया है !
भाता नहीं था मिलना मेरा जिनको एक पल भी
मेरी मौत कि खबर ने उनको भी रुलाया है !
मनोज "मनु"
"माया"
पतझड़ में भी गुल खिलते हैं
सब उसके पीछे चलते हैं
रस्ते स्वयं बना लेते हैं
जिसके कदम चले चलते हैं !
आज न जाने क्यूँ सब रूठे
क्यूँ अपनों के दामन छूटे
माया कहती मैं न रहूँ तो
रिश्ते भी अपने छलते हैं !
जल न रहा तो डाली सूखी
रिश्तों की हरियाली सूखी
फूलों की खुशबू कहती है
पोषण से जीवन चलते हैं !
नन्ही खुशियाँ टाली जाती हैं
बस उम्मीदें पाली जाती हैं
पेट पालने की कोशिश में
बच्चों के सपने जलते हैं !
रौशन हो यदि पथ अपना तो
दुश्मन भी संग चले आते हैं
ज्यों -ज्यों गहराए अँधियारा
अपने साये भी छलते हैं !
पूरी हर आस नहीं होती
हर मंजिल पास नहीं होती
यार ख़ुशी के आगे पीछे
गम के बादल भी चलते हैं !
मनोज 'मनु'
पतझड़ में भी गुल खिलते हैं
सब उसके पीछे चलते हैं
रस्ते स्वयं बना लेते हैं
जिसके कदम चले चलते हैं !
आज न जाने क्यूँ सब रूठे
क्यूँ अपनों के दामन छूटे
माया कहती मैं न रहूँ तो
रिश्ते भी अपने छलते हैं !
जल न रहा तो डाली सूखी
रिश्तों की हरियाली सूखी
फूलों की खुशबू कहती है
पोषण से जीवन चलते हैं !
नन्ही खुशियाँ टाली जाती हैं
बस उम्मीदें पाली जाती हैं
पेट पालने की कोशिश में
बच्चों के सपने जलते हैं !
रौशन हो यदि पथ अपना तो
दुश्मन भी संग चले आते हैं
ज्यों -ज्यों गहराए अँधियारा
अपने साये भी छलते हैं !
पूरी हर आस नहीं होती
हर मंजिल पास नहीं होती
यार ख़ुशी के आगे पीछे
गम के बादल भी चलते हैं !
मनोज 'मनु'
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